Turning unreasonable anxiety into unlikely ideas

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wood dawn dark desk

अनबन

clear glass with red sand grainer Photo by Pixabay on Pexels.com

ज़रा सी थी अनबन वक़्त से मेरी

वो मेरे आगे आगे ही चला हरदम

बड़ी देर तक चला, बड़ी दूर चला

बमुश्किल मैं तुमसे दूर हो सका

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क्यूं हसरतों के जाल में फसते हो रोज़ रोज़

जो तुमको था पाना, वो दीवाना है किसी का

white bubble illustration Photo by Miguel Á. Padriñán on Pexels.com

क्या हुआ फायदा समझा के खुद को

वो शक्स चला गया, बस खयाल रहा

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इतने जो मसरूफ़ दिखते हो

किसपे नज़र रखते हो

किसकी खबर चाहते हो

broken wooden pencils on top of blank sheets of paper Photo by Tara Winstead on Pexels.com

खुद को दो तसल्ली, करो उसपे ऐतबार

पल भर का है धोखा, बिखरोगे बार बार

light flight bird flying

ऐसी भी कमी लोगों की नहीं

बात चले कहीं से रुके तुम पे

light flight bird flying

ऐसी भी कमी लोगों की नहीं

बात जो आकर आप पे रुके

bolt_in_the_grass

मैंने कल एक कील खरीदी

आखिर कितना वक़्त गवाता,
उलझन से कब तक मुह फिराता
चुनकर एक हज़ारों में,
मैंने कल एक कील खरीदी


“दो कौड़ी की कील है ये तो”
एक नज़र देख, दोस्त ने बोला
चाचा कितना ही चुन के लाये
एक साल न कपड़े टिक पाए

dussehra

Dussehra


दशेहरा

रावण तो हर साल जलाते
अबके कुछ और जलाओ
दूजे धर्म के लोग जलाओ
नीच जाती के जन जलाओ

जिससे कोई बैर बचा हो
उसको चुनके आग लगाओ
बचे न कोई अलग हमसे
सबको एक सामान बनाओ

फर्क नही कर पाओगे,
तो नीति क्या बनाओगे?
भूस में आग लगाने को
चिंगारी कहाँ से लाओगे?

और जब सारे, एक से होंगे
फिर कैसे उत्पात मचेगा
भेद की आढ़ में सेंध लगे तो
खून खराबा रुक जायेगा?

Hisaab

हिसाब

चलो फिर हिसाब हो ही जाये
मुनासिब तारिख ढूँढ ली जाये

चलो फिर हिसाब हो ही जाये
मुनासिब तारिख ढूँढ ली जाये

जो कहर हमपे बरपा है, वापस देदो
ज़ुल्म जो धाएं हैं, उनका सौदा होगा

तारीफें अपनी, चुन चुन के लौटादो
जो कोई छूटी, उसपे ब्याज लगेगा

निकाल के फ़ोन से, तस्वीरें दे देंगे,
पर जो लम्हे भूले जाते नही
उनके बदले क्या लीजियेगा?

याद रखिये कि ये लड़ाई बेवजह है
वजह ढूँढने का दोनों को वक़्त नही

कई फितूर तुम्हारे, मेहफूस रखे हैं
शौक से मांग लो, मगर
किसी को देने में हड़बड़ी न करना

कोई और ढूँढना पड़ेगा तुम्हारे लिए
हम सा नही, हम से भी कहीं
एक तारिख उसके लिए भी ढूँढो


paper_boats_hires

Lattu

लट्टू

खुद ही फीते बाँधने में जुट गया
इतना नाराज़ हो गया माँ से
फिर लट्टू लेकर घूमता रहा
कमरे से निकला
हवा से दरवाज़ा बंद हो गया
लट्टू अन्दर, बाहर डोर हाँथ में थी
बेवकूफी ने जोर लगाया तो टूट गयी


दिन ही खराब था, शायद
सुबह से डोरों से झूझ रहा था
फीते बंधे नही तो जूते में फसा लिए
दौड़ते ही निकल जाते
अब लट्टू टूट गया, बस डोर रह गयी


थोड़ी देर दरवाज़े को ताका
लॉक खोलने की कोशिश करी
फिर भगा लॉन की तरफ
मिटटी के धेले से लट्टू बनाया
नया लट्टू न पहले जैसा दिखता था
न ही घूमता
मगर टूटे तो बनाना आसान था


शाम को माँ से दोस्ती कर ली
फीते बाँधने आ गये
कमरा खुला, लट्टू जुड़ गया


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