Short


मकान

एक मकान ख़रीदा है
बड़ी खिड़कियों वाला

धुप से नाहाता है
शाम होते ही गुनगुनाता है

चौखट पे तुम्हारे लगाए
छोटे छोटे आईने रंगने बचे हैं

नकल

नकल करते हैं खुशी की
पर उदासी छिप नहीं पाती
स्लेट के चेहरे पे बनी
चाक से हंसी टिक नहीं पाती

बहुत हो गया बचपना
बड़ों की तरह बन जाओ
हर सवाल का सच्चा जवाब
देने की जरूरत नहीं होती

शिकायतें इकट्ठा करने
 की आदत छोड़ दो
 भिगो दो लिख कर हसरतें
 गीले कागज से उड़ नहीं पाती

शर्त

हाल-ए-दिल तो हम सुना दें,
बशर्ते कोई ऐतबार तो करे

फलक पे हम सज़ा लें तउम्र 
बशर्ते कोई प्यार तो करे

फ़िक्र करने वाले बेशुमार मिले
मुश्किल है मिलना, जो प्यार करे 

हसरत

सभी उस हाल से हैरान हैं
के जसमे हाथ है हर एक का

ना कोई शाख़ बची महफूस
सभी को छांव की हसरत है

पुराने इश्क़ की दरारों में
फूल खिले हैं देख ज़रा

मेरे ख़त तो मिले होंगे
वरना दराजो में देख ज़रा
हम जो बदलते रहे उनके इशारों पे 
उनकी शिकायत रही, इतना बदलते क्यूँ हैं
लबों पे चिपका है गुड़ सा माज़ी मेरा
जायके और उलझन एक साथ देता  
न कभी जिक्र हवाओं से मेरा कर बैठना तुम
चुगलखोर उगल देंगी, तुमपे कितना मरते हैं हम
क्या मिला ज़माने से लड़ के हमें,
ख़ुद से लड़ते हुए बस ज़माने गए
कल बड़ी देर तक चलता ही रहा 
इस गुमा में के तुमसे दूर हो सकू
माँ को शक्ल में कोई ऐब नही दिखता 
हाँथ फेरके बालों से नुक्स हटा देती है

एक साल

एक साल में सौ खो गये 
सवा सौ करोड़ की भीड़ से

तुम फ़ैज़ की बातें करते हो
इन्हें मौत से फ़र्क़ नहीं पड़ता

जहां जान बचाने आए थे
वहीं जान से हाथ धो बैठे 

नियत

राख के सनन्दर हैं
जिन्हें आँसुयों से सींच रहे हो

नियत नहीं माज़ी है इसे
बदलने में क्यूँ लगे हो

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